युगों का चमत्कार।
युगों का चमत्कार।
एक ऐसे समय में जब न छपाई (प्रिंटिंग) थी और न ही किताबें व्यापक रूप से फैली हुई थीं… चंद शब्द सामने आए… लेकिन उन्होंने दिलों, दिमाग़ों और सभ्यताओं के स्वरूप को बदल दिया।
वे शब्द जिन्होंने अन्याय का सामना किया, और पत्थर के बुतों से पहले आत्माओं के अंदर की मूर्तियों को तोड़ डाला।
वे शब्द जिन्होंने सृष्टि, आत्मा, करुणा, न्याय, समय और मृत्यु के बारे में बात की… एक ऐसी भाषा में, जिसकी नकल आज तक कोई नहीं कर पाया।
ये शब्द एक “किताब” बन गए… एक ऐसी किताब जिसके करीब समय भी नहीं आ सका… वह है क़ुरआन।
वह सवाल जो कोई भी सच्चा शोधकर्ता पूछता है: एक रेगिस्तान में रहने वाला अनपढ़ व्यक्ति (उम्मी) ऐसे शब्द कैसे ला सका जो आज भी वैज्ञानिकों को हिला देते हैं?
यह सवाल साधारण नहीं है… यह उस सत्य की ओर ले जाता है जिसने लाखों मनुष्यों को बदल दिया।