क्या अन्याय (मज़ालिम) बिना हिसाब के ख़त्म हो जाएगा

क्या अन्याय (मज़ालिम) बिना हिसाब के ख़त्म हो जाएगा
एक महीने पहले

इस जीवन में, हो सकता है कि शोषित (पीड़ित) अपना हक़ पाए बिना ही दुनिया से कूच कर जाए, और अत्याचारी (ज़ालिम) सज़ा से बच जाए… लेकिन क्या यह कहानी का अंत है? 


इस्लाम जवाब देता है: नहीं। 


एक दिन आएगा जब हर कोई एक ऐसे न्यायपूर्ण (आदिल) ख़ालिक़ (रचनाकार) के सामने खड़ा होगा जो किसी पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता। 


वह दिन जब कर्मों को ऐसी सटीकता से तौला जाएगा जिसमें कोई त्रुटि नहीं होगी, और हर इंसान को उसका हक़ लौटा दिया जाएगा। 


यह वह संपूर्ण न्याय है जिसका हृदय अपनी रचना के समय से ही प्रतीक्षा कर रहा है। 


अल्लाह तआला फ़रमाता है: {और हम क़ियामत के दिन न्याय के तराज़ूरखेंगे। फिर किसी पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।} [अल्-अम्बिया 21:47]

#ईश्वरीय_न्याय #क़यामत_का_दिन #आख़िरत"

समान डिज़ाइन