क्या ग़ैब (अदृश्य) महज़ एक कल्पना है या हकीकत?

क्या ग़ैब (अदृश्य) महज़ एक कल्पना है या हकीकत?
एक महीने पहले

हम हवा को नहीं देखते... फिर भी उसके अस्तित्व में विश्वास रखते हैं। 


इसी तरह, एक मुस्लिम ग़ैब (अदृश्य) पर विश्वास रखता है जिसके बारे में अल्लाह ने बताया है — बरज़ख (जो मृत्यु और पुनरुत्थान के बीच की विभाजक अवस्था है जहाँ क़यामत के दिन तक आत्माएँ रहती हैं), हिसाब, जन्नत (स्वर्ग) और जहन्नम (नरक)।


ग़ैब कोई कल्पना नहीं है, बल्कि एक हक़ीक़त (सत्य) है जिसकी ख़बर अल्लाह ने अपनी किताब में दी है और जिसे उसके रसूलों ने स्पष्ट किया है।


ग़ैब पर ईमान (विश्वास) लाना ही बुद्धि और आत्मा दोनों के साथ ईमान की शुरुआत है। 


क्योंकि, जो कुछ दिखाई नहीं देता, वह सब ग़ैर-मौजूद (अस्तित्वहीन) नहीं होता।


#ग़ैब_पर_ईमान #आख़िरत_का_जगत #मौत_के_बाद_की_ज़िंदगी

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