क्या आप मानते हैं कि कब्र ही अंत है?

क्या आप मानते हैं कि कब्र ही अंत है?
एक महीने पहले

आपकी ज़िंदगी एक छोटी यात्रा (सफ़र) है जो माँ के से शुरू होकर क़ब्र पर समाप्त होती है... लेकिन इस्लाम हमें बताता है कि क़ब्र एक पड़ाव है, समाप्ति नहीं।


दुनिया और आख़िरत (परलोक) के बीच एक बरज़ख़ (मध्यवर्ती लोक) है जो हर इंसान का हिसाब के दिन तक इंतज़ार करता है, जहाँ आपको अपने अमलों (कर्मों) और इंतिख़ाबात (चुनावों) का सही अर्थ समझ आता है।


तो क्या आपने उस मरहले (पड़ाव) के लिए अपना रास्ते का सामान (ज़ाद) तैयार कर लिया है?


क़ब्र आख़िरत की पहली मंज़िल है, लिहाज़ा अपनी तैयारी आज ही शुरू करें। 


#मौत_के_बाद_की_ज़िंदगी #रूह_का_सफ़र #आख़िरत_पर_ईमान

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