इस्लाम जन्नत (स्वर्ग) और जहन्नम (नरक) का चित्रण कैसे करता है?
इस्लाम हमें सिखाता है कि जन्नत (स्वर्ग) वह स्थान है जो हर उस व्यक्ति का इंतजार कर रहा है जिसने अल्लाह पर विश्वास किया और अच्छे कर्म किए; यह एक ऐसा स्थान है जिसकी सुंदरता की कोई सीमा नहीं है, जो शाश्वत सुख-सुविधाओं से भरा है, जहाँ न कोई बीमारी है, न कोई दर्द और न कोई दुःख।
वहीं जहन्नम (नर्क) शाश्वत दंड का स्थान है, जहाँ उन लोगों को सज़ा दी जाएगी जिन्होंने ईमान (विश्वास) छोड़ दिया और झूठ में जीवन व्यतीत किया, बिना तौबा (पश्चाताप) किए या अपने कर्मों को सुधारे।
जन्नत और जहन्नम महज़ अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि क़यामत (न्याय के दिन) की अनिवार्य सच्चाईयाँ हैं।
इस्लाम में, ईश्वरीय न्याय ही यह तय करता है कि किसे जन्नत से पुरस्कृत किया जाएगा और किसे जहन्नम में दंडित किया जाएगा।
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