हमारे सृकिितात ने हमें ऐसी अक़्िें (कववेि) दीों, ज उसिी महानता ि महसूस िर सिें और ऐसा स्वभाव प्रदान किया, ज उसिी सोंपूितता ि प्रमाकित िरता है और बताता है कि उसिे अोंदर किसी िमी िा पाया जाना सोंभव नहीों है ।
इबादत िेवि अल्लाह ही िी ह नी चाकहए। क्य कों ि वही सोंपूित है और एिमाि इबादत िा हक़दार है । उसिे कसवा किसी और िी इबादत उकचत नहीों है । क्य कों ि उसिे कसवा ि ई सोंपूित एवों पररपूित नहीों है । सबि मौत आनी है और फना ह जाना है ।
इन्सान, बुत, पेड या जानवर िा पूज्य पािनहार ह ना असोंभव है ।
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