तमाम नबी तथा रसूल इस तथ्य पर एकमत हैं कि आख़िरत में केवल मुसलमानों ही को मुक्ति मिलेगी, जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, किसी को उसका साझी नहीं बनाते और तमाम नबियों एवं रसूलों पर विश्वास रखते हैं। रसूलों के सारे अनुयायी और उनपर विश्वास रखने वाले तथा उनको सच्चा मानने वाले सारे लोग जन्नत में प्रवेश पाएँगे तथा जहन्नम से मुक्ति प्राप्त करेंगे।
चुनांचे जो लोग अल्लाह के नबी मूसा अलैहिस्सलाम के ज़माने में रहे, उनपर ईमान लाए और उनकी शिक्षाओं पर अमल किया, वो सच्चे मोमिन व मुसलमान थे। लेकिन जब अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम को भेज दिया, तो मूसा अलैहिस्सलाम का अनुसरण करने वालों पर ईसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाना अनिवार्य हो गया। ऐसे में, जो लोग ईसा अलैहिस्सलाम पर ईमान ले आए, वे सच्चे मुसलमान हैं।
इसके विपरीत जिन्होंने ईसा अलैहिस्लाम को ठुकरा दिया और मूसा अलैहिस्सलाम के दीन पर क़ायम रहने की ज़िद पर अड़े रहे, वे मोमिन नहीं हैं। क्योंकि उन्होंने अल्लाह के भेजे हुए एक रसूल पर ईमान लाने से मना कर दिया।
फिर जब अल्लाह ने अंतिम रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को भेजा, तो सभी लोगों के लिए उन पर ईमान लाना अनिवार्य हो गया। क्योंकि वह पालनहार रब जिसने मूसा एवं ईसा अलैहिमस्सलाम को रसूल बनाकर भेजा, उसी पालनहार ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अंतिम रसूल बनाकर भेजा, इस लिए जो व्यक्ति मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को रसूल नहीं मानेगा और कहेगा कि मैं मूसा अलैहिस्सलाम अथवा ईसा अलैहिस्सलाम के धर्म पर ही रहूंगा वह व्यक्ति मोमिन नहीं है।
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