जो व्यक्ति इस्लाम ग्रहण करना चाहे, उसे कोई अनुष्ठान नहीं कराना है। किसी की उपस्थिति भी आवश्यक नहीं है। हाँ, अगर किसी मुसलमान की उपस्थिति या किसी इस्लामी केंद्र में इस्लाम ग्रहण करे, तो सबसे अच्छा है। लेकिन अगर ऐसा न हो, तो कोई बात नहीं।
बस इतना कह देना काफ़ी है : "أشهد أن لا إله إلا الله وأشهد أن محمدًا رسول الله" (मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं।) अगर इस वाक्य को अरबी भाषा में बोल सके, तो ठीक है। अगर इसमें कठिनाई हो, तो अपनी भाषा में बोल दे।
इतने भर से वह मुसलमान हो जाएगा। उसके बाद वह अपना दीन सीखे, जो दुनिया में उसके सुखमय जीवन तथा आख़िरत में मुक्ति का स्रोत है।
टिप्पणियाँ 0