वही से पहले एक रूह जो गहरे अर्थ की तलाश में थी

वह अनजान नहीं थे

वह भोले नहीं थे

01

वह जीवन को अच्छी तरह जानते थे

02

उन्होंने काम किया सफर किया व्यापार किया और लोगों से मिले

03

उन्होंने सब कुछ देखा

ज़ुल्म

गरीबी

अंधविश्वास

बुतपरस्ती

कमज़ोरों का शोषण

अपनी क़ौम में सफलता के बावजूद उन्हें लगता था कि कुछ कमी है

कि दुनिया यूं ही बिना अर्थ के नहीं हो सकती

हिरा की गुफा क्यों

वह जबल अन नूर पर एक छोटी सी गुफा में अकेले जाते थे

भागने के लिए नहीं बल्कि खोजने के लिए

कभी कभी दिल वह जान लेता है जिसे शब्द बयान नहीं कर पाते

वह घंटों गहरे सन्नाटे में बैठते मक्का को दूर से देखते जैसे एक दुनिया को देख रहे हों जो बदलाव का इंतजार कर रही हो

2- वह रात जिसने इतिहास को दो हिस्सों में बांट दिया

एक रात वह गुफा में थे

उन्होंने एक आवाज़ सुनी

एक ऐसी आवाज़ जो धरती की नहीं थी

जिब्रील आए और उन्होंने उनसे एक शब्द कहा पढ़ो

उन्होंने कभी कोई किताब नहीं पढ़ी थी और न पढ़ना सीखा था

मगर संदेश कागज़ के बारे में नहीं था

वह मानवता के लिए एक नया दरवाज़ा खोलने के बारे में था

वह क्षण जैसे उनके दिल में नूर की एक चमक उतर गई

पहाड़ कांप उठा और उनकी रूह भी उसके साथ कांप गई

दृश्य इतना शक्तिशाली क्यों था

क्योंकि संदेश केवल पाठ नहीं था

वह शुरुआत थी

समाज को बदलने की

अखलाक को नए सिरे से परिभाषित करने की

इंसान को भय से मुक्त करने की

आसमान को ज़मीन से जोड़ने की

3- घर वापसी संदेश की शुरुआत एक महिला के दिल से

वह पहाड़ से जल्दी लौटे गहरी सांस लेते हुए और उनकी आंखों में हैरानी बोलती थी

वह अपनी पत्नी ख़दीजा के पास पहुंचे डर के साथ और उन्होंने उन्हें गले लगा लिया

उन्होंने ऐसे शब्द कहे जिन्होंने उनके दिल में सुकून लौटा दिया अल्लाह की कसम अल्लाह तुम्हें कभी रुस्वा नहीं करेगा

मानो संदेश की शुरुआत एक ऐसी महिला के दिल में हुई जो उनके नबी होने से पहले ही उन पर ईमान रखती थी

वह क्षण संदेश के लिए पहला इंसानी सहारा बना

4- क़ुरआन के उतरने की शुरुआत एक ऐसा क्षण जो दिल को हिला देता है

उस रात के बाद वही धीरे धीरे उतरने लगी

वे साधारण शब्द नहीं थे

वे ऐसे शब्द थे जो रूह को हिला देते थे

जो पत्थर के बुतों से पहले दिमाग के बुत तोड़ते थे

और इंसान से कहते थे

तुम खोई हुई मख्लूक नहीं हो बल्कि एक बड़ी कहानी का हिस्सा हो

पहली वही ने इंसान की गरिमा को बहाल किया

पढ़ो अपने रब के नाम से जिसने पैदा किया

उसने इंसान को जमे हुए खून की लटकती हुई चीज़ से पैदा किया

पढ़ो और तुम्हारा रब सबसे बड़ा करीम है

जिसने कलम से सिखाया

जिसने इंसान को वह सिखाया जो वह नहीं जानता था

सूरह अल अलक 1 से 5

मानो संदेश ने अपनी पहली ही घड़ी में घोषणा कर दी

इंसान बुतों के गुलाम नहीं

न कबीलों के

न अंधविश्वास के

बल्कि केवल अल्लाह के बंदे हैं और गरिमा आती है अक्ल सच और न्याय से

5- लोगों ने उनका विरोध क्यों किया

इसलिए नहीं कि उन्होंने झूठ बोला

वह बचपन से ही सादिक और अमीन थे

और इसलिए नहीं कि उन्होंने ज़ुल्म किया

वह मक्का के सबसे अधिक रहम करने वाले थे

बल्कि इसलिए कि संदेश ने जाहिली व्यवस्था की जड़ों पर वार किया

उसने घमंडी की सत्ता तोड़ दी

कमज़ोर के शोषण को रोका

कबीले की विशेषाधिकारों को मिटाया

पत्थरों की पूजा का झूठ उजागर किया

ऐसी समानता की पुकार दी जो उनके लिए अजनबी थी

ताकतवरों का डरना स्वाभाविक है उस व्यक्ति से जो ताकत को नए सिरे से परिभाषित करने आए

6- गुप्त दावत फिर खुली दावत ऐसी हिम्मत जिसकी व्याख्या केवल ईमान है

तीन वर्ष उन्होंने गुप्त रूप से दावत दी

थोड़े से लोगों के साथ दार अल अरक़म में मिलते रहे

डर की वजह से नहीं बल्कि इसलिए कि संदेश को पहले रूहानी निर्माण चाहिए था

फिर उन्होंने दावत को खुलकर घोषित किया

उन्होंने यह नहीं कहा कि मेरा अनुसरण करो मैं तुम्हें धन दूंगा

उन्होंने कहा कहो ला इलाहा इल्लल्लाह तुम सफल हो जाओगे

वाक्य एक ही था

मगर उसने मक्का की अर्थव्यवस्था को हिला दिया

उसके धर्म को

उसकी राजनीति को

उसकी परंपराओं को

7- तेरह साल यातना के नीचे भी डटे रहना

जो लोग उन पर ईमान लाए वे धनवान नहीं थे

वे कमज़ोर थे

अम्मार

बिलाल

खब्बाब

यासिर का परिवार

उन्हें लोगों के सामने यातना दी गई

मगर वे पीछे नहीं हटे

यह अकेला तथ्य संदेश की शक्ति को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है क्योंकि झूठ पर कोई व्यक्ति यातना के नीचे टिक नहीं सकता

8- वह रुके क्यों नहीं

यह सवाल हर उस व्यक्ति के सामने आता है जो उनकी सीरत को ईमानदारी से पढ़ता है

वह एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके पास सत्ता नहीं थी

न सेना थी

न धन था

फिर भी उन्होंने चुनौती दी

मक्का के सरदारों को

मक्का की अर्थव्यवस्था को

मक्का की मान्यताओं को

अरब के सबसे शक्तिशाली कबीलों को

वह चुप रह सकते थे

एक सम्मानित और प्रिय व्यापारी बनकर जी सकते थे

मुसीबतों से दूर रह सकते थे

मगर एक ही सच्चाई उन्हें चला रही थी

संदेश उनकी ओर से नहीं था बल्कि रब्बुल आलमीन की ओर से था

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