यह वाक्य यह समझाता है कि एक सच्चा मुसलमान दर्द और कठिनाइयों का सामना करते हुए भी टूटता नहीं है, क्योंकि उसकी आस्था और ईश्वर पर विश्वास उसे शक्ति प्रदान करते हैं। इस्लाम सिखाता है कि हर कठिनाई के बाद राहत होती है, और ईश्वर का सहारा हमें हर संघर्ष से पार पाने की ताकत देता है।
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